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    गुणवत्तापूर्ण शोध की आधारशिला पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन: यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका, जयपुर में तीन दिवसीय शोध कार्यशाला का शुभारंभ

    3 months ago

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका जयपुर के अनुसंधान विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय शोध कार्यशाला के प्रथम दिवस पर गुणवत्तापूर्ण शोध की मूल अवधारणाओं, शोध समस्या चयन एवं उपयुक्त शोध पद्धति के विषय में विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।

    डॉ.मंजू सिंह, मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जयपुर की वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं शोध विशेषज्ञ, ने कहा कि एक सफल शोध की शुरुआत सही समस्या की पहचान से होती है। उन्होंने स्पष्ट शोध उद्देश्यों, सशक्त शोध प्रश्नों तथा समाजोपयोगी परिणामों पर आधारित प्रस्ताव तैयार करने पर विशेष बल दिया।

    डॉ. पियूषा मजूमदार, सह-प्राध्यापक, आईआईएचएमआर विश्वविद्यालय तथा टेडएक्स वक्ता, ने शोध पद्धति के चयन को शोध की विश्वसनीयता का आधार बताया। उन्होंने मात्रात्मक, गुणात्मक तथा मिश्रित शोध विधियों के व्यावहारिक उपयोग तथा सही संदर्भ में उनके चयन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

    प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने कहा कि शोध केवल शैक्षणिक आवश्यकता नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने प्रतिभागियों को शोध में मौलिकता, नैतिकता एवं जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।

     

    प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाला शोध किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान और विश्वसनीयता को सुदृढ़ करता है। उन्होंने प्रतिभागियों को नवाचार, शोध नैतिकता तथा समाजोपयोगी अनुसंधान को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

     

    प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. अंकित गांधी ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक परिवेश में शोध कौशल का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को युवा शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक बताते हुए वैश्विक स्तर की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।

     

    आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ समन्वयक डॉ. रजनी माथुर ने कार्यशाला के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम संस्थान में शोध संस्कृति को मजबूत करते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से प्राप्त ज्ञान को अपने शोध एवं शिक्षण कार्य में उपयोग करने का आह्वान किया तथा सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

    कार्यशाला की रूपरेखा डॉ. भाग्यश्री खरे द्वारा तैयार की गई। कार्यशाला का संचालन डॉ. चारु दुबे ने किया।

     

    डॉ रजनी माथुर ने बताया कि कार्यशाला के आगामी सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा शोध विश्लेषण, अकादमिक लेखन, संदर्भण, प्रकाशन रणनीति एवं शोध नैतिकता पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। 24 फरवरी को डॉ. क्षिप्रा जैन, सहायक प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग, राजस्थान विश्विद्यालय, डेटा विश्लेषण एवं सांख्यिकीय व्याख्या पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगी।

    डॉ. मोनू भार्गव, प्रोफेसर, फैकल्टी ऑफ इनोवेशन, रिसर्च एंड एंटरप्रेन्योरशिप, (पूर्णिमा यूनिवर्सिटी )अकादमिक लेखन, संदर्भण एवं शोध सत्यनिष्ठा पर मार्गदर्शन देंगी।

    इसी प्रकार 25 फरवरी को डॉ. दीपक कुमार गुप्ता, कंसल्टेंट स्टैटिस्टिशियन एवं शोध विश्लेषक, उच्च प्रभाव वाले शोध पत्र लेखन एवं प्रकाशन रणनीतियों पर प्रकाश डालेंगे।

    डॉ. रोहित जैन, संस्थापक एवं निदेशक, ट्रेड इनोवेशन सर्विसेज प्रा. लि., जयपुर, शोध नैतिकता, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) एवं जिम्मेदार अनुसंधान व्यवहार पर विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे।

     

    वर्कशॉप में शोधार्थियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए सत्रों को अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बताया।

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