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    जनवरी में साइबर अपराधों पर कड़ा शिकंजा: हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने 117 मामले दर्ज किए, सात राज्यों से 37 आरोपी गिरफ्तार

    3 hours ago

    Yugcharan / 08/02/2026

    तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियानों के तहत साइबर क्राइम पुलिस ने जनवरी 2026 के दौरान कुल 117 मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों की जांच के दौरान देश के सात अलग-अलग राज्यों से 37 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई डिजिटल अपराधों की बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए अपनाई गई बहु-राज्यीय रणनीति का हिस्सा है।

    साइबर क्राइम विंग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दर्ज किए गए मामलों में बड़ी संख्या ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी निवेश योजनाओं, सोशल मीडिया के माध्यम से ठगी, फिशिंग, ओटीपी और लिंक के जरिए बैंक खातों से अवैध निकासी, तथा पहचान की चोरी से जुड़े हैं। इन अपराधों में आम नागरिकों के साथ-साथ नौकरीपेशा लोग, वरिष्ठ नागरिक और छोटे कारोबारी भी निशाना बने।

    पुलिस के अनुसार, 117 मामलों में से 26 मामले सीधे हैदराबाद शहर से संबंधित हैं, जबकि शेष मामलों की कड़ियां तेलंगाना के अन्य जिलों और देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़ी पाई गईं। जांच में यह सामने आया कि अपराधियों का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और वे तकनीक का इस्तेमाल कर एक राज्य में बैठकर दूसरे राज्य के लोगों को ठग रहे थे।

    सात राज्यों तक फैला नेटवर्क

    जांच के दौरान जिन राज्यों से आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, उनमें तेलंगाना के अलावा आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, बिहार और दिल्ली शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इन राज्यों में स्थानीय पुलिस के सहयोग से एक साथ छापेमारी कर आरोपियों को पकड़ा गया। कई मामलों में आरोपियों ने फर्जी सिम कार्ड, नकली बैंक खाते और डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल कर अपराध को अंजाम दिया।

    अधिकारी ने बताया कि कुछ आरोपी ऐसे गिरोहों से जुड़े थे, जो कॉल सेंटर या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को आकर्षक रिटर्न का लालच देकर निवेश के लिए उकसाते थे। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि कई पीड़ितों से लाखों रुपये की ठगी की गई।

    जांच के तरीके और तकनीकी विश्लेषण

    साइबर क्राइम पुलिस ने इन मामलों की जांच में डिजिटल फॉरेंसिक तकनीकों, बैंक ट्रांजैक्शन एनालिसिस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) का सहारा लिया। संदिग्ध मोबाइल नंबरों, आईपी एड्रेस और सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच कर अपराधियों तक पहुंच बनाई गई। कई मामलों में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह साबित हुआ कि एक ही गिरोह अलग-अलग नामों और तरीकों से लोगों को निशाना बना रहा था।

    पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधों की प्रकृति तेजी से बदल रही है और अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर कानून से बचने की कोशिश करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए साइबर क्राइम विंग ने अपने अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी संसाधनों को मजबूत किया है।

    पीड़ितों को राहत और जागरूकता पर जोर

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तारियों के साथ-साथ पीड़ितों को राहत दिलाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। कई मामलों में ठगी की गई राशि को फ्रीज कर दिया गया है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीड़ितों को वापस दिलाने की कोशिश की जा रही है।

    इसके अलावा, साइबर क्राइम पुलिस आम नागरिकों को जागरूक करने के लिए भी अभियान चला रही है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक, ई-मेल या सोशल मीडिया संदेशों पर भरोसा न करें। किसी भी तरह की ऑनलाइन धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।

    भविष्य की रणनीति

    साइबर क्राइम विंग के अनुसार, आने वाले महीनों में ऐसे अभियानों को और तेज किया जाएगा। पुलिस का फोकस अंतर-राज्यीय गिरोहों को चिन्हित करने, तकनीकी ढांचे को मजबूत करने और बैंकिंग तथा टेलीकॉम एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाने पर रहेगा। अधिकारियों का मानना है कि साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्यों के बीच बेहतर तालमेल और सूचना साझा करना बेहद जरूरी है।

    पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि साइबर अपराधों के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। जनवरी 2026 के आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि साइबर अपराधों के खिलाफ लड़ाई में पुलिस सक्रिय है, लेकिन साथ ही यह भी दर्शाता है कि डिजिटल दुनिया में सतर्कता और जागरूकता पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गई है।

     

    हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाकर ही साइबर अपराधों को रोका जा सकता है।

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