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    शिक्षा के मंदिरों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देंगे: अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजकीय विद्यालय में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप पर महासंघ सख्त

    7 hours ago

    कहा- विद्यालयों में बाहरी दखल और शिक्षकों के राजनीतिक इस्तेमाल का पुरजोर विरोध

    जयपुर। राजकीय विद्यालयों को राजनीतिक गतिविधियों और बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त रखने के मुद्दे पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने अपना रुख और अधिक स्पष्ट करते हुए कहा है कि शिक्षा के मंदिरों को किसी भी कीमत पर राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा।

    महासंघ के प्रदेश संघठन मंत्री उमराव लाल वर्मा ने कल की घटना के संदर्भ में कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ कुछ बाहरी लोगों द्वारा एक राजकीय विद्यालय में निरीक्षण के प्रयास का ग्रामीणों ने विरोध किया। इस दौरान विवाद बढ़ने और कधित रूप से गाली-गलौज तथा मारपीट की स्थिति उत्पन्न होने की जानकारी सामने आई है। महासंघ ने स्पष्ट किया कि हिंसा या मारपीट का किसी भी परिस्थिति में समर्थन नहीं किया जा सकता. लेकिन यह सवाल भी गंभीर है कि राजनीतिक विवादों को राजकीय विद्यालयों तक ले जाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। यदि किसी व्यक्ति या संगठन को किसी राजकीय विद्यालय की व्यवस्था, सुविधाओं अथवा शैक्षणिक स्थिति को लेकर कोई आपत्ति है तो उसके लिए शिक्षा विभाग और प्रशासन के निर्धारित माध्यम खुले हैं। विद्यालय परिसर में बिना निर्धारित प्रक्रिया के प्रवेश कर राजनीतिक विवाद खड़ा करना किसी भी रूप में उचित नहीं है।

    "विद्यालय में शिक्षा होगी, राजनीति नहीं"

    अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल ने कहा कि राजस्थान सरकार ने पिछले कुछ समय में विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए चरणबद्ध तरीके से अनेक प्रयास किए हैं। ये सुधार एक सतत प्रक्रिया हैं और आने वाले समय में भी जारी रहेंगे। विद्यालयों में संसाधनों, शिक्षण व्यवस्था, अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार और शिक्षा विभाग लगातार काम कर रहे हैं। राजनीति करना किसी का लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है, लेकिन राजकीय विद्यालयों को राजनीतिक संघर्ष का मंच बनाना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। महासंघ ने कहा कि शिक्षकों को राजनीतिक दबाव या राजनीतिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने का प्रयास शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए हैं, किसी राजनीतिक दल के एजेंडे के लिए नहीं।

    सरकार के दिशा-निर्देशों का महासंघ ने किया समर्थन

    संभाग उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का समर्थन करते हुए कहा कि विद्यालयों में बाहरी एवं राजनीतिक हस्तक्षेप को नियंत्रित करने के लिए जारी दिशा-निर्देशों का उद्देश्य विद्यालयों को सुरक्षित, अनुशासित और शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि इन दिशा-निर्देशों का अर्थ किसी व्यक्ति को विद्यालय में जाने से रोकना नहीं है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत संस्था प्रधान की अनुमति लेकर विद्यालय में प्रवेश किया जा सकता है। ऐसे में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय सरकारी आदेशों को ही राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।

    "राजनीतिक लाभ के लिए विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ न हो"

    प्रदेश संघठन मंत्री देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल अथवा संगठन को अपनी राजनीतिक गतिविधियों के लिए लोकतांत्रिक मंचों का उपयोग करना चाहिए। राजकीय विद्यालयों में जाकर राजनीतिक टकराव पैदा करना न विद्यार्थियों के हित में है, न शिक्षकों के हित में और न ही राजस्थान की शिक्षा

    व्यवस्था के हित में।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी विद्यालय की वास्तविक समस्याएं सामने आती हैं तो संगठन उनका समाधान कराने के लिए प्रशासन के समक्ष तथ्यात्मक एवं लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने के पक्ष में है। लेकिन विद्यालयों को राजनीतिक प्रचार, निरीक्षण अथवा शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील

    महासंघ ने ग्रामीणों, शिक्षकों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों तथा सभी राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों से अपील की कि विद्यालयों से जुड़े किसी भी विषय को लेकर टकराव की स्थिति उत्पन्न न करें। किसी भी विवाद का समाधान कानून और निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाए।

    महासंघ ने कहा कि वह हिंसा का विरोध करता है, लेकिन विद्यालयों में राजनीतिक हस्तक्षेप का भी उतनी ही दृढ़ता से विरोध करता है। यदि भविष्य में किसी राजकीय विद्यालय में नियमों की अनदेखी कर राजनीतिक गतिविधि अथवा बाहरी हस्तक्षेप का प्रयास किया जाता है तो महासंघ संबंधित अधिकारियों के समक्ष मामला उठाएगा और आवश्यकतानुसार वैधानिक एवं लोकतांत्रिक कार्रवाई के लिए आगे बढ़ेगा।

    अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का स्पष्ट संदेश है-

    "विद्यालय बच्चों के भविष्य निर्माण के केंद्र हैं, राजनीतिक संघर्ष के नहीं। शिक्षा के मंदिरों की गरिमा से कोई समझौता नहीं होगा और शिक्षकों को राजनीति का टूल बनाने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।"

    एबीआरएसएम विद्यालय शिक्षा भारत के सभी विद्यालयों को तीर्थ रूप में विकसित करने के लिए लगातार जनता, एसडीएमसी के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों को प्रेरित करते हुए विद्यालय में भौतिक संसाधन उपलब्ध कराने शैक्षणिक सुधार करने के लिए लगातार प्रयत्नशील है। वर्तमान में राजस्थान में 10000 स्कूलों में ABRSM से जुड़े शिक्षक कार्यकर्ता बंधु इस दिशा में कार्य कर रहे हैं, उन विद्यालयों में शिक्षा में गुणात्मक सुधार के साथ साथ इस दिशा में बहुत ही अनुकरणीय काम हुआ है।

     

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