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    अंबेडकर जयंती पर संविधान की चुनौतियों पर मंथन, युवाओं को जागरूक रहने का दिया संदेश

    4 hours ago

    जयपुर। राजीव गांधी स्टडी सर्कल, भारत सेवा संस्थान एवं बियानी लॉ कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया।

    कार्यक्रम का विषय “वर्तमान में संविधान व संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष चुनौतियां एवं संभावनाएं” रहा। 

    कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथि स्वागत के साथ हुई। कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज के प्रोफेसर एवं मुख्य वक्ता प्रो. रतनलाल, विशिष्ट अतिथि जी.एस. बाफना (पूर्व महामंत्री, भारत सेवा संस्थान), पूर्व अध्यक्ष राजस्थान लोक सेवा आयोग बी.एम. शर्मा तथा सह-समन्वयक, राजीव गांधी स्टडी सर्कल के डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल उपस्थित रहे।

    इसके साथ ही बियानी कॉलेज के चेयरमेन डॉ. राजीव बियानी, निदेशक डॉ. संजय बियानी सहित कई गणमान्य सदस्य भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

    स्वागत भाषण के दौरान विशिष्ट अतिथि जी.एस. बाफना (पूर्व महामंत्री, भारत सेवा संस्थान) ने संविधान के मूल्यों को समाज में स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने अनुच्छेद 14 और 19 का उल्लेख करते हुए कहा कि आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीमाएं देखने को मिल रही हैं। उन्होंने जोर दिया कि बाबा साहेब के सपनों को पूरा करने के लिए संस्थाओं का मजबूत और निष्पक्ष होना जरूरी है।

    उन्होंने चुनाव प्रक्रिया, राज्यों के अधिकार, और सार्वजनिक सेवकों की भूमिका पर चिंता जताई तथा कहा कि शिक्षा का अधिकार होने के बावजूद इसकी पूर्ण प्राप्ति के लिए संघर्ष जारी है। अंत में उन्होंने अहिंसा के माध्यम से बदलाव लाने की बात कही।

    वहीं हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में मुख्य वक्ता प्रो. रतनलाल ने संविधान के सामने वर्तमान चुनौतियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि डॉ. अम्बेडकर विचारों में जीवित हैं, केवल मूर्तियों में नहीं, और 

    उन्होंने बताया कि संविधान के लिए सबसे बड़ी चुनौती तब पैदा होती है जब कानून और प्रशासन दोनों स्तरों पर समानता लागू नहीं होती। 

    साथ ही, उन्होंने कुछ संगठनों, विचारधाराओं, निजीकरण और कॉरपोरेट प्रभाव को भी संवैधानिक मूल्यों के लिए चुनौती बताया। अंत में उन्होंने जोर दिया कि संविधान के प्रभावी संचालन के लिए उसके सिद्धांतों को ईमानदारी से लागू करना आवश्यक है। 

    इस अवसर पर राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अपने उद्बोधन में डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि संविधान उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण और समानता के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि संविधान में सभी प्रावधान निर्धारित हैं, लेकिन वर्तमान समय में उसके सामने कई गंभीर चुनौतियाँ खड़ी हैं और देश में तानाशाही जैसी स्थिति बनती दिखाई दे रही है।

    उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि जब मोदी जी प्रधानमंत्री बने थे, तब रोजगार के अवसर बढ़ने की बात कही गई थी, लेकिन वर्तमान में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने डॉलर और रुपये के अंतर को कम करने के वादों का भी उल्लेख किया, जो अब तक पूरे नहीं हो सके हैं।

    टीकाराम जूली ने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे कथनी और करनी के अंतर को समझें। उन्होंने कहा कि आज समाज में मेहनत और विकास के साथ-साथ जाति और धर्म की राजनीति भी हावी हो रही है। उन्होंने कहा कि हमारा देश आज भी एकजुट है तो उसका मुख्य कारण हमारा संविधान है। इसलिए वर्तमान समय में संविधान की रक्षा करना और उसके सिद्धांतों का पालन करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

    अध्यक्षीय उद्बोधन पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान लोक सेवा आयोग बी.एम. शर्मा ने दिया, जिसमें उन्होंने युवाओं को संविधान के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा दी।साथ ही यह भी कहा कि जब सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र मजबूत होगा, तभी राजनीतिक लोकतंत्र स्वतः सुदृढ़ होगा। अंत में उन्होंने कहा कि संविधान की सफलता उसे लागू करने वालों पर निर्भर करती है।

    अंत में धन्यवाद ज्ञापन सह-समन्वयक, राजीव गांधी स्टडी सर्कल, राजस्थान, डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल द्वारा किया गया, जिसमें उन्होंने सभी का आभार व्यक्त किया।

    उन्होंने सोनम वांगचुक का उदाहरण देते हुए कहा कि विरोध करने पर कई बार लोगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज ऐसी स्थिति बन रही है, जहाँ न्यायपालिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

    उन्होंने अंत में सभी से अपील की कि देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह संविधान की रक्षा करे और उसे मजबूत बनाए।

    इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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