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    इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में ‘मीडिया लिटरेसी बियॉन्ड फेक न्यूज़’ पुस्तक का लोकार्पण, डिजिटल युग में मीडिया साक्षरता की आवश्यकता पर जोर’’

    1 month ago

    जयपुर। इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में मीडिया और डिजिटल युग में सूचना की समझ को केंद्र में रखकर लिखी गई महत्वपूर्ण पुस्तक ’’मीडिया लिटरेसी बियोंड फेक न्यूज“ का लोकार्पण एक गरिमामय कार्यक्रम में किया गया। इस अवसर पर ’’प्रो. (डॉ.) के. जी. सुरेश’’, निदेशक, इंडिया हैबिटेट सेंटर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। प्रो. सुरेश माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के पूर्व कुलपति तथा भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक भी रह चुके हैं। कार्यक्रम में प्रो. रितु दुबे तिवारी, पिं्रसिपल, निस्कॉर्ट मीडिया कॉलेज, गाजियाबाद भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

     

    कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने डिजिटल युग में तेजी से फैल रही सूचना और दुष्प्रचार की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि आज मीडिया साक्षरता केवल फेक न्यूज़ की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों में आलोचनात्मक सोच, सूचना की सत्यता की जांच और मीडिया के प्रभाव को समझने की क्षमता विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। पुस्तक मीडिया लिटरेसी बियोंड फेक न्यूज में डिजिटल मीडिया पारिस्थितिकी, एल्गोरिद्मिक प्रभाव, सूचना सत्यापन, मीडिया उपभोग के बदलते पैटर्न और नागरिकों की मीडिया समझ को विकसित करने जैसे समकालीन मुद्दों पर व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक विशेष रूप से मीडिया और संचार अध्ययन के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, पत्रकारों और शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में उपयोगी मानी जा रही है।

     

    इस पुस्तक के लेखक डॉ. अमित वर्मा हैं, जो मीडिया एवं संचार अध्ययन से जुड़े एक सक्रिय शिक्षाविद और शोधकर्ता हैं। डॉ. वर्मा मीडिया साक्षरता, डिजिटल मीडिया, कम्युनिटी रेडियो और संचार अध्ययन के क्षेत्र में निरंतर शोध और लेखन कर रहे हैं। उनके कई शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त वे संचार और प्रबंधन से जुड़े दो पीयर-रिव्यूड जर्नलों के संपादक भी हैं और इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर मीडिया एंड कम्युनिकेशन रिसर्च पेरिस फं्रास के सहभागी संचार अनुसंधान अनुभाग के वाइस चेयर के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

     

    अपने संबोधन में प्रो. सुरेश ने कहा कि आज के समय में मीडिया साक्षरता लोकतांत्रिक समाज की एक अनिवार्य आवश्यकता बन गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पुस्तकें नागरिकों को सूचना के प्रति सजग और विवेकपूर्ण दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करती हैं तथा मीडिया के प्रभाव को समझने की क्षमता बढ़ाती हैं। प्रो. तिवारी ने भी पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि यह कृति मीडिया शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है, जो विद्यार्थियों और शोधार्थियों को डिजिटल युग में मीडिया के बदलते स्वरूप और उसके प्रभावों को समझने में मदद करेगी। 

     

    कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षाविदों, मीडिया विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने पुस्तक को समकालीन मीडिया परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए इसकी सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुस्तक मीडिया साक्षरता के क्षेत्र में नए विमर्श को आगे बढ़ाने और समाज में जागरूक मीडिया उपभोक्ता तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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