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    नई ईपीएस-2026 पेंशन योजना में बड़ा बदलाव: अधिक सैलरी पर पेंशन चुनने वाला प्रावधान हटाया गया

    1 month ago

    Yugcharan News / 12 March 2026

    नई दिल्ली: कर्मचारियों के भविष्य और पेंशन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण नीति बदलाव के तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक में स्वीकृत नई कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-2026) में एक बड़ा बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था में उस विवादित प्रावधान को हटा दिया गया है, जिसके तहत कर्मचारियों और नियोक्ताओं को सीमित समय के भीतर अधिक वेतन के आधार पर पेंशन का विकल्प चुनने की अनुमति दी जाती थी।

    यह निर्णय हाल ही में हुई Employees' Provident Fund Organisation की केंद्रीय न्यासी बोर्ड बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री Mansukh Mandaviya ने की। नई पेंशन योजना को देश में लागू Code on Social Security के प्रावधानों के अनुरूप तैयार किया गया है, जो नवंबर 2025 से प्रभावी हो चुका है।

    नई योजना के तहत पुराने Employees’ Pension Scheme 1995 में मौजूद वह प्रावधान हटा दिया गया है, जिसमें कर्मचारियों को अधिक वेतन के आधार पर पेंशन पाने के लिए अतिरिक्त योगदान देने का विकल्प मिलता था। इस बदलाव के बाद अब कर्मचारियों के लिए पेंशन गणना का ढांचा अलग तरीके से लागू किया जाएगा।

    क्या था पुराना प्रावधान

    पुरानी कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-1995) में एक विशेष प्रावधान था, जिसके तहत कर्मचारी और नियोक्ता मिलकर तय वेतन सीमा से अधिक वेतन के आधार पर पेंशन योगदान कर सकते थे। इसके लिए कर्मचारियों को अपने वेतन के उस हिस्से पर भी योगदान करना पड़ता था जो निर्धारित वेतन सीमा से ऊपर होता था।

    हालांकि इस विकल्प को चुनने के लिए एक समय सीमा निर्धारित की गई थी। नियमों के अनुसार कर्मचारियों और नियोक्ताओं को अधिकतम एक वर्ष के भीतर इस विकल्प का उपयोग करना होता था। इसके बाद ही उन्हें अधिक वेतन के आधार पर उच्च पेंशन प्राप्त करने का अधिकार मिल सकता था।

    समय के साथ यह प्रावधान कई कारणों से विवादों में रहा। विशेषज्ञों का मानना था कि इस विकल्प को लेकर कर्मचारियों में पर्याप्त जागरूकता नहीं थी और कई कर्मचारियों को समय सीमा के कारण इस लाभ से वंचित होना पड़ा।

    EPFO बोर्ड ने क्यों हटाया यह प्रावधान

    केंद्रीय न्यासी बोर्ड के अनुसार यह प्रावधान अब “अप्रासंगिक” या पुराना हो चुका था। अधिकारियों का कहना है कि नए श्रम कानूनों और सामाजिक सुरक्षा संहिता के लागू होने के बाद पेंशन प्रणाली को नए ढांचे के अनुसार पुनर्गठित करना जरूरी था।

    सूत्रों के अनुसार बोर्ड की बैठक में यह विचार सामने आया कि पुराने नियम वर्तमान आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं रह गए हैं। इसी वजह से नई EPS-2026 योजना तैयार करते समय इस प्रावधान को शामिल नहीं किया गया।

    सरकारी अधिकारियों का कहना है कि नई योजना का उद्देश्य पेंशन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सरल और आधुनिक बनाना है ताकि सभी कर्मचारियों को समान रूप से लाभ मिल सके।

    सामाजिक सुरक्षा संहिता का प्रभाव

    नई पेंशन योजना तैयार करने का मुख्य कारण देश में लागू नई श्रम व्यवस्था है। Code on Social Security के लागू होने के बाद कई पुराने श्रम कानूनों और योजनाओं को नए ढांचे में समायोजित किया जा रहा है।

    इस संहिता का उद्देश्य देश के संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। इसके तहत पेंशन, भविष्य निधि, बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एकीकृत ढांचे में लाने का प्रयास किया जा रहा है।

    नई EPS-2026 योजना भी इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है।

    कर्मचारियों पर संभावित असर

    विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक वेतन के आधार पर पेंशन विकल्प हटाए जाने से कुछ कर्मचारियों पर असर पड़ सकता है। विशेष रूप से वे कर्मचारी जो उच्च वेतन पर पेंशन योगदान करना चाहते थे, अब उन्हें अलग व्यवस्था के तहत अपनी सेवानिवृत्ति योजना बनानी पड़ सकती है।

    हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि नई पेंशन व्यवस्था का उद्देश्य पेंशन प्रणाली को अधिक संतुलित और टिकाऊ बनाना है। अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय में इससे पेंशन प्रणाली की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होगी।

    पहले भी उठ चुके हैं विवाद

    उच्च वेतन पर पेंशन का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों में कई बार विवादों में रहा है। इस विषय पर कई कर्मचारियों और संगठनों ने अदालतों का भी रुख किया था। उनका तर्क था कि कर्मचारियों को उनके वास्तविक वेतन के आधार पर पेंशन का विकल्प मिलना चाहिए।

    वहीं सरकार और EPFO का कहना था कि पेंशन प्रणाली को स्थिर बनाए रखने के लिए कुछ सीमाएं आवश्यक हैं।

    नई EPS-2026 योजना में इस विवादित प्रावधान को हटाने के बाद संभावना है कि पेंशन व्यवस्था को लेकर नए नियमों और दिशानिर्देशों पर आगे और चर्चा हो सकती है।

    आगे क्या

    नई पेंशन योजना के लागू होने के बाद कर्मचारियों और नियोक्ताओं को उसके नियमों के अनुसार अपने योगदान और पेंशन योजना को समायोजित करना होगा। सरकार आने वाले समय में इसके विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकती है, जिससे कर्मचारियों को स्पष्ट रूप से समझाया जा सके कि नई व्यवस्था में पेंशन की गणना और योगदान कैसे किया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में हो रहे इन सुधारों का उद्देश्य दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना है। हालांकि कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं आने वाले समय में इस नीति बदलाव के प्रभाव को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    नई EPS-2026 योजना के साथ भारत की पेंशन व्यवस्था एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, जहां सरकार का लक्ष्य सामाजिक सुरक्षा ढांचे को आधुनिक और अधिक समावेशी बनाना बताया जा रहा है।

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