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    पश्चिम एशिया संकट पर ईरान से बातचीत जारी रहेगी: संसद में बोले विदेश मंत्री

    1 month ago

    Yugcharan News / 10 March 2026

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में हालिया घटनाओं के बावजूद ईरान के साथ संवाद बनाए रखने का प्रयास जारी रहेगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में एक स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) बयान देते हुए कहा कि भारत की प्राथमिकता क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    राज्यसभा में दिए गए अपने वक्तव्य में विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर भारत लगातार नजर बनाए हुए है और सरकार ने हालिया घटनाओं के बाद ईरानी नेतृत्व से संपर्क स्थापित करने की कोशिश भी की थी। हालांकि, क्षेत्र में जारी संघर्ष और अस्थिर परिस्थितियों के कारण तत्काल संपर्क स्थापित करना संभव नहीं हो सका।


    भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

    विदेश मंत्री ने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत सरकार की “सबसे बड़ी प्राथमिकता” है।

    उन्होंने बताया कि सरकार क्षेत्र में मौजूद भारतीय दूतावासों और कांसुलर कार्यालयों के माध्यम से लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर नागरिकों की सहायता के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की जा सकती हैं।

    सरकार का कहना है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखा गया है।


    संघर्ष के बाद संपर्क की कोशिश

    विदेश मंत्री के अनुसार हालिया सैन्य घटनाओं के बाद भारत ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि भारत ने कूटनीतिक माध्यमों के जरिए स्थिति को समझने और संवाद बनाए रखने का प्रयास किया।

    हालांकि उस समय क्षेत्र में जारी संघर्ष और सुरक्षा परिस्थितियों के कारण प्रत्यक्ष संपर्क स्थापित करना कठिन हो गया था।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत आगे भी ईरान के साथ बातचीत जारी रखने की कोशिश करेगा।


    समुद्री गतिविधियों से जुड़ी जानकारी

    संसद में दिए गए बयान के दौरान विदेश मंत्री ने समुद्री क्षेत्र से जुड़ी एक घटना का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अपने तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर आने की अनुमति मांगी थी।

    यह अनुरोध उस समय किया गया था जब क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही थी। हालांकि बाद में क्षेत्रीय घटनाओं के कारण परिस्थितियां बदल गईं।

    विदेश मंत्री ने इस संदर्भ में कहा कि भारत समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्क बना हुआ है।


    ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर नजर

    भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों की स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। विदेश मंत्री ने संसद में कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रवाह भारत की विदेश नीति के प्रमुख पहलुओं में शामिल हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार मार्गों पर पड़ सकता है।

    भारत दुनिया के प्रमुख ऊर्जा आयातक देशों में से एक है और पश्चिम एशिया क्षेत्र उसके लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत माना जाता है। इसलिए क्षेत्र में स्थिरता भारत की आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं से सीधे जुड़ी हुई है।


    संसद में चर्चा और राजनीतिक प्रतिक्रिया

    विदेश मंत्री के बयान के दौरान संसद में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा देखने को मिली। विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों ने क्षेत्र की स्थिति और भारत की कूटनीतिक रणनीति को लेकर सवाल और सुझाव भी रखे।

    कुछ विपक्षी नेताओं ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए अधिक स्पष्ट रणनीति की मांग की, जबकि सरकार की ओर से कहा गया कि वर्तमान परिस्थितियों में संतुलित और सावधानीपूर्ण कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।

    सरकारी पक्ष का कहना है कि भारत पारंपरिक रूप से संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में रहा है।


    क्षेत्रीय स्थिति पर वैश्विक नजर

    पश्चिम एशिया में हालिया घटनाओं ने वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। कई देशों ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अपने नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।

    भारत जैसे बड़े आर्थिक और ऊर्जा आयातक देश के लिए यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।


    भारत की संतुलित कूटनीतिक नीति

    विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार भारत आमतौर पर पश्चिम एशिया के जटिल भू-राजनीतिक समीकरणों में संतुलित रुख अपनाने की कोशिश करता है।

    भारत के कई देशों के साथ आर्थिक, ऊर्जा और रणनीतिक संबंध हैं। इसलिए भारत अक्सर संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता का समर्थन करता रहा है।

    विदेश मंत्री के बयान को भी इसी व्यापक कूटनीतिक दृष्टिकोण के संदर्भ में देखा जा रहा है।


    आगे की स्थिति पर नजर

    सरकार ने संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे के कदम उठाए जाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में क्षेत्रीय घटनाक्रम और कूटनीतिक प्रयास यह तय करेंगे कि स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

    फिलहाल भारत का ध्यान अपने नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की निरंतरता बनाए रखने पर केंद्रित है।

    संसद में विदेश मंत्री के बयान से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि भारत क्षेत्रीय संकट के बीच भी संवाद और कूटनीति के रास्ते को जारी रखने की कोशिश करेगा, जबकि राष्ट्रीय हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

     
     
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