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    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के तृतीय दिवस पर पाठ्यक्रम परिणाम निर्धारण एवं शोध पत्र लेखन पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

    1 hour ago

     

     

    जयपुर। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका, जयपुर में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान विद्यापीठ के सहयोग से आयोजित पाँच दिवसीय संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम (FDP) के तृतीय दिवस पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत पाठ्यक्रम परिणाम निर्धारण तथा शोध पत्र लेखन विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए।

    कार्यक्रम का आयोजन 28 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय के ब्लॉक ए स्थित सेमिनार हॉल-1 में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को पाठ्यक्रम परिणाम एवं कार्यक्रम परिणाम के निर्धारण, उनके पारस्परिक संबंध तथा गुणवत्तापूर्ण शोध पत्र तैयार करने की प्रक्रिया से परिचित कराना था।

    कार्यक्रम का शुभारंभ आइक्यूएसी समन्वयक एवं संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम की संयोजक डॉ. रजनी माथुर द्वारा स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ। उन्होंने विशेषज्ञ वक्ताओं एवं उपस्थित संकाय सदस्यों का स्वागत करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में परिणाम-आधारित शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण तथा शोध की महत्ता पर प्रकाश डाला।

    प्रथम सत्र में डॉ. एस.वी.एच. नागेंद्र ने “पाठ्यक्रम परिणाम (COs) एवं कार्यक्रम परिणाम (POs) का निर्धारण एवं मानचित्रण” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने पाठ्यक्रम परिणाम और कार्यक्रम परिणाम की अवधारणा, उनके निर्धारण की प्रक्रिया तथा दोनों के बीच संबंध स्थापित करने की विधियों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि परिणाम-आधारित शिक्षा के माध्यम से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, उद्देश्यपरक एवं गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सकता है।

    द्वितीय सत्र में डॉ. कुलदीप शर्मा ने शोध पत्र लेखन विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने शोध पत्र तैयार करने की विभिन्न प्रक्रियाओं, उपयुक्त शोध विषय के चयन, साहित्य समीक्षा, शोध समस्या के निर्धारण, शोध पद्धति, आँकड़ों के विश्लेषण तथा निष्कर्षों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शोध पत्र की संरचना, अकादमिक लेखन में मौलिकता, संदर्भों के उचित उल्लेख तथा शोध नैतिकता के पालन के महत्त्व को भी रेखांकित किया। इस सत्र का उद्देश्य संकाय सदस्यों को गुणवत्तापूर्ण शोध पत्र तैयार करने एवं शोध प्रकाशन की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने में सहायता प्रदान करना था।

    कार्यक्रम के दौरान मनीषा यादव ने प्रतिभागियों के साथ संवाद स्थापित करते हुए प्रतिक्रिया एवं विचार-विमर्श सत्र का संचालन किया। इस दौरान प्रतिभागियों ने विषयों से संबंधित प्रश्न पूछे तथा विशेषज्ञों के साथ अपने विचार साझा किए। संवादात्मक सत्र ने शिक्षकों को अपने शैक्षणिक एवं शोध संबंधी अनुभवों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया।

    विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट प्रोफ़ेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि परिणाम-आधारित शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण शोध एवं अकादमिक लेखन उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों को नवीन शैक्षणिक पद्धतियों, शोध कौशल तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करने के लिए सक्षम बनाते हैं।

    कार्यक्रम का मंच संचालन खुशबू चौधरी ने प्रभावी ढंग से किया। अंत में डॉ. जितेंद्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विशेषज्ञ वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

    कार्यक्रम का तृतीय दिवस शिक्षकों के शैक्षणिक कौशल, परिणाम-आधारित शिक्षण तथा शोध लेखन क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में उपयोगी रहा। इस प्रकार का संकाय विकास कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों की प्राप्ति तथा उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण पहल है।

     

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