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    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के द्वितीय दिवस पर शोध, नवाचार एवं परीक्षा सुधारों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

    1 hour ago

    जयपुर. यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका, जयपुर में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान विद्यापीठ के सहयोग से आयोजित पाँच दिवसीय संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम (FDP) के द्वितीय दिवस पर शोध एवं नवाचार, बौद्धिक संपदा अधिकार तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत परीक्षा एवं मूल्यांकन सुधारों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। कार्यक्रम का आयोजन ब्लॉक-ए स्थित सेमिनार हॉल-1 में किया गया।

    कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. जितेंद्र कुमार गोयल के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए संकाय विकास कार्यक्रम की प्रासंगिकता तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में इसके योगदान पर प्रकाश डाला।

    प्रथम सत्र में विश्वविद्यालय के अनुसंधान अधिष्ठाता डॉ. रोहित सारस्वत ने “उच्च शिक्षा में बौद्धिक संपदा अधिकारों की संस्कृति का संवर्धन : शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता विकसित करने, अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा नवीन विचारों एवं आविष्कारों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने शिक्षकों को शोधपरक दृष्टिकोण अपनाने और नवाचार आधारित शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

    द्वितीय सत्र में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. कमल किशोर जांगिड़ ने “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत परीक्षा एवं मूल्यांकन सुधार : चुनौतियाँ एवं सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में सुधार, मूल्यांकन की पारदर्शिता, विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण व्यवस्था तथा प्रभावी मूल्यांकन पद्धतियों की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, निष्पक्ष एवं परिणामोन्मुख बनाने पर बल दिया।

    इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना एवं प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधनों में संकाय विकास कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास, अनुसंधान एवं नवाचार की संस्कृति को सुदृढ़ करने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में ऐसे कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने शिक्षकों से नवीन शैक्षणिक पद्धतियों को अपनाने तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए प्रयासरत रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम की संयोजक एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की समन्वयक डॉ. रजनी माथुर ने कहा कि इस पाँच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन तथा परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली में नवीन सुधारों के प्रति जागरूक एवं सक्षम बनाना है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षता बढ़ाने, अनुसंधान संस्कृति को सुदृढ़ करने तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन, विशेषज्ञ वक्ताओं, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

    कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रतिभागियों के साथ विचार-विमर्श किया गया तथा उनसे कार्यक्रम संबंधी प्रतिक्रियाएँ प्राप्त की गईं। मनीषा यादव ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए दोनों विशेषज्ञ वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रबंधन, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

    संकाय विकास कार्यक्रम का द्वितीय दिवस शोध, नवाचार, बौद्धिक संपदा संरक्षण तथा परीक्षा एवं मूल्यांकन सुधारों के प्रति शिक्षकों की समझ विकसित करने और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।

     

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