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    जंतर मंतर प्रदर्शन पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, पुलिस से मांगा जवाब; CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश

    1 hour ago

    युगचरण न्यूज़ | 22 जुलाई 2026

    नई दिल्ली: जंतर मंतर और संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि मामले से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए ताकि जांच के दौरान उनका उपयोग किया जा सके।

    मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाओं में उठाए गए आरोप किसी एक व्यक्ति की अलग-थलग घटना नहीं हैं। इसलिए इसे केवल निजी शिकायत का मामला मानकर नहीं छोड़ा जा सकता।

    हाईकोर्ट ने कहा- यह कोई अलग-थलग घटना नहीं

    सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस की उस दलील पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि यदि किसी व्यक्ति को शिकायत है तो वह संबंधित थाने में जाकर मामला दर्ज करा सकता है।

    खंडपीठ ने कहा कि यदि यह केवल एक व्यक्तिगत घटना होती तो शिकायतकर्ता को निजी शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा जा सकता था, लेकिन यहां बड़ी संख्या में लोगों से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में अदालत पूरे मामले पर पुलिस का विस्तृत पक्ष जानना चाहती है।

    पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस

    अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस दोनों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को दो सप्ताह का समय जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दिया गया है।

    साथ ही अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि घटना से संबंधित सभी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार सुरक्षित रखे जाएं।

    मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को होगी।

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

    याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि 20 और 21 जुलाई को जंतर मंतर तथा दिल्ली के अन्य इलाकों में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया।

    प्रदर्शनकारी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आई थीं, जिनमें कई लोगों के घायल होने की खबरें भी आई थीं।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से क्या कहा गया

    याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत में कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ अत्यधिक कठोर व्यवहार किया गया।

    दलील दी गई कि प्रदर्शन करना संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का हिस्सा है और पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बल प्रयोग से पहले आवश्यक चेतावनी दिए जाने जैसे नियमों का पालन नहीं किया गया।

    उन्होंने अदालत से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग भी की।

    वीडियो और सीसीटीवी साक्ष्यों का मुद्दा

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दावा किया कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर उपलब्ध कई वीडियो में कथित पुलिस कार्रवाई दिखाई दे रही है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि सभी सीसीटीवी फुटेज और वीडियो सुरक्षित रखने का आदेश दिया जाए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के साक्ष्य नष्ट न हों।

    अदालत ने इस मांग को स्वीकार करते हुए संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।

    दिल्ली पुलिस का पक्ष

    दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में कहा कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई थी और कुछ स्थानों पर पत्थरबाजी जैसी घटनाएं भी हुईं।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति को पुलिस के खिलाफ शिकायत है तो वह विधि के अनुसार संबंधित मंच पर शिकायत दर्ज करा सकता है। साथ ही यह दलील भी दी गई कि अदालत को पहले पुलिस का पक्ष सुनना चाहिए।

    अदालत ने फिलहाल कोई निष्कर्ष नहीं निकाला

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने अभी तक याचिकाओं में लगाए गए आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम राय नहीं बनाई है।

    अदालत ने कहा कि वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। फिलहाल आवश्यक है कि सभी संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रहें और पुलिस अपना विस्तृत जवाब अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे।

    मामले पर आगे क्या होगा

    अब दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार अदालत में अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद याचिकाकर्ताओं की प्रतिक्रिया ली जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।

    फिलहाल हाईकोर्ट के नोटिस और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश को इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप माना जा रहा है। अदालत की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

     
     
     
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