Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    तमिलनाडु में विधायकों को मुफ्त कार देने पर सियासी घमासान, DMK ने ठुकराया सरकार का प्रस्ताव

    5 hours ago

    Yugcharan News / 21 August 2026

    चेन्नई: तमिलनाडु में विधायकों को सरकारी वाहन उपलब्ध कराने के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के फैसले को लेकर सत्तारूढ़ सरकार और विपक्षी DMK के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। मुख्यमंत्री द्वारा राज्य के सभी 234 विधायकों को उनके विधानसभा क्षेत्रों में कामकाज के लिए सरकारी कार उपलब्ध कराने की घोषणा के बाद विपक्ष ने इस फैसले की आर्थिक जरूरत और सरकारी खर्च को लेकर सवाल उठाए हैं।

    विधानसभा में शुक्रवार को इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने घोषणा की कि DMK के सभी 59 विधायक सरकार की ओर से दी जाने वाली कार की सुविधा नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि जब राज्य सरकार लगातार वित्तीय दबाव और कर्ज की स्थिति का उल्लेख करती रही है, तो ऐसे समय में विधायकों के लिए नई सुविधाओं पर खर्च करने के फैसले पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    उदयनिधि स्टालिन ने सरकार से यह भी मांग की कि सरकारी वाहन उपलब्ध कराने से पहले विधायकों के चुनावी हलफनामों की जांच की जाए। उनके अनुसार, यह देखा जाना चाहिए कि संबंधित विधायक के पास पहले से निजी वाहन है या नहीं और उनकी आर्थिक स्थिति क्या है।

    DMK ने आर्थिक स्थिति को बनाया मुद्दा

    DMK का कहना है कि राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए सभी विधायकों को समान रूप से वाहन उपलब्ध कराने का निर्णय उचित नहीं है। पार्टी ने यह भी संकेत दिया कि जिन विधायकों के पास पहले से वाहन और पर्याप्त संसाधन हैं, उन्हें सरकारी सुविधा देने के बजाय जरूरतमंद जनप्रतिनिधियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    उदयनिधि ने सरकार की उस राजनीतिक स्थिति पर भी सवाल उठाया जिसमें सरकार एक ओर राज्य के वित्तीय बोझ की बात करती है और दूसरी ओर विधायकों के लिए अतिरिक्त सुविधाओं की घोषणा कर रही है। DMK ने इसी आधार पर प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार किया है।

    हालांकि, सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि योजना का उद्देश्य विधायकों को व्यक्तिगत लाभ देना नहीं बल्कि उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से काम करने के लिए आवश्यक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।

    सरकार ने बताया—कार विलासिता नहीं, काम की जरूरत

    सरकार की ओर से मंत्री आधव अर्जुन ने प्रस्ताव का बचाव किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का उद्देश्य सभी विधायकों के साथ समान व्यवहार करना है। सरकार का तर्क है कि विधानसभा में कई ऐसे विधायक हैं जो पहली बार चुने गए हैं और अपेक्षाकृत सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवारों से आते हैं।

    मंत्री के अनुसार, कुछ छोटे दलों और वामपंथी दलों के विधायकों के पास निजी वाहन तक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उनके लिए निर्वाचन क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनना और प्रशासनिक स्तर पर उनका समाधान कराने की कोशिश करना मुश्किल हो सकता है।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन विधायकों के पास पहले से कार है, उन्हें सरकारी वाहन लेने के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। इस व्यवस्था को जरूरत और कार्य से जोड़कर देखा जा रहा है।

    मंत्री ने विपक्ष के नेता के सरकारी आवास में रहने को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि यदि वे सरकारी वाहन की सुविधा नहीं लेना चाहते, तो उन्हें सरकारी आवास का उपयोग करने पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इस बयान ने विधानसभा में राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया।

    मुख्यमंत्री ने बुधवार को की थी घोषणा

    तमिलनाडु सरकार की ओर से बुधवार को विधानसभा में विधायकों के लिए सरकारी वाहन उपलब्ध कराने की घोषणा की गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा था कि विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में नियमित रूप से जाना पड़ता है और वहां लोगों की समस्याओं को समझने के लिए लगातार यात्रा करनी होती है।

    सरकार का कहना है कि सरकारी वाहन उपलब्ध होने से विधायकों को अपने क्षेत्र में अधिक व्यवस्थित तरीके से काम करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, इसका उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को उनके प्रशासनिक और सार्वजनिक दायित्वों को पूरा करने के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक सहायता देना है।

    सरकार ने इस कदम को पारदर्शी और प्रभावी प्रशासन से भी जोड़कर पेश किया है। उसका तर्क है कि जब जनप्रतिनिधियों को आधिकारिक कार्यों के लिए निर्धारित परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी, तो उनके निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े दौरे और अन्य आधिकारिक गतिविधियां अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित की जा सकेंगी।

    ₹75,000 मासिक भत्ता भी घोषित

    सरकार के प्रस्ताव में केवल वाहन उपलब्ध कराने की बात ही नहीं है। विधायकों के लिए कार के चालक, ईंधन और रखरखाव से जुड़े खर्चों के लिए ₹75,000 प्रति माह का भत्ता देने की भी घोषणा की गई है।

    इस प्रावधान ने विपक्ष की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। आलोचकों का कहना है कि वाहन उपलब्ध कराने के साथ-साथ हर विधायक के लिए मासिक खर्च का प्रावधान राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल सकता है।

    वहीं सरकार का कहना है कि यह राशि विधायकों के व्यक्तिगत खर्च के लिए नहीं, बल्कि निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े आधिकारिक परिवहन की जरूरतों को पूरा करने के लिए है। सरकार के अनुसार, विधायक लगातार अपने क्षेत्रों में यात्रा करते हैं और उनके काम के लिए वाहन, चालक, ईंधन तथा रखरखाव जैसी सुविधाएं आवश्यक हैं।

    VCK विधायक की मांग के बाद सामने आया प्रस्ताव

    विधायकों के लिए सरकारी वाहन की जरूरत का मुद्दा विधानसभा में VCK विधायक जोथिमणि द्वारा उठाया गया था। उन्होंने कहा था कि पर्याप्त लॉजिस्टिक सहायता के बिना विधायकों के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से काम करना मुश्किल हो सकता है।

    इसी चर्चा के बाद सरकार ने सभी 234 विधायकों के लिए सरकारी वाहन उपलब्ध कराने की घोषणा की। सरकार का कहना है कि विधानसभा में मौजूद कई नए विधायक ऐसे हैं जो सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं और उनके लिए अपने पूरे निर्वाचन क्षेत्र में लगातार यात्रा करना आसान नहीं है।

    इसलिए सरकार इस योजना को सभी विधायकों के लिए समान अवसर और आधिकारिक कामकाज में सुविधा उपलब्ध कराने के रूप में देख रही है।

    राजनीतिक विवाद के बीच आर्थिक सवाल अहम

    तमिलनाडु में इस फैसले ने केवल सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस को ही नहीं बढ़ाया है, बल्कि सरकारी खर्च और जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी चर्चा शुरू कर दी है।

    DMK का विरोध मुख्य रूप से राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर है, जबकि सरकार का कहना है कि विधायकों को मिलने वाली सुविधा सीधे उनके सार्वजनिक दायित्वों से जुड़ी है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ इस मुद्दे को जनता के सामने रख रहे हैं।

    आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस योजना के क्रियान्वयन के लिए कौन से नियम तय करती है और निजी वाहन रखने वाले विधायकों के लिए पात्रता की जांच किस प्रकार की जाती है। साथ ही, सरकारी वाहन और ₹75,000 मासिक खर्च की व्यवस्था का वास्तविक वित्तीय प्रभाव भी राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

     

    फिलहाल DMK के 59 विधायकों द्वारा सुविधा ठुकराने के फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति में इस मुद्दे को प्रमुख बना दिया है। सरकार जहां इसे विधायकों के कामकाज को आसान बनाने वाला कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राज्य के वित्तीय संसाधनों के इस्तेमाल से जोड़कर सवाल उठा रहा है।

    Click here to Read More
    Previous Article
    दिल्ली पुलिस स्टेशन में राहुल गांधी का धरना, युवक की पेलट चोटों को लेकर FIR दर्ज करने की मांग
    Next Article
    केंद्र ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की अमेरिका यात्रा को नहीं दी मंजूरी, लंदन दौरा बीच में छोड़कर लौटेंगे

    Related देश Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment