Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    दिल्ली पुलिस स्टेशन में राहुल गांधी का धरना, युवक की पेलट चोटों को लेकर FIR दर्ज करने की मांग

    5 hours ago

    Yugcharan News / 21-08-2026

    नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में धरना दिया। वह 19 वर्षीय साहिल लोचब को कथित तौर पर लगी पेलट गन की चोटों के मामले में FIR दर्ज करने की मांग कर रहे थे। साहिल के अनुसार, उसे 20 जुलाई को राजधानी में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बीच पेलट से चोटें लगी थीं।

    राहुल गांधी शुक्रवार को साहिल लोचब और अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ पहले मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। वहां उन्होंने युवक की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज करने की मांग की। मांग पूरी नहीं होने के बाद राहुल गांधी पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे, जहां उन्होंने सेंट्रल दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा से मुलाकात की।

    पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद भी जब कांग्रेस की मांग पर तत्काल सहमति नहीं बनी, तो राहुल गांधी और साहिल लोचब पुलिस स्टेशन परिसर में ही धरने पर बैठ गए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनकी मांग स्पष्ट है—साहिल की शिकायत पर FIR दर्ज की जाए और उन्हें FIR नंबर उपलब्ध कराया जाए।

    पुलिस ने कहा—शिकायत मिली, कार्रवाई जारी

    सेंट्रल दिल्ली के DCP सचिन शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि पेलट गन के कथित इस्तेमाल से संबंधित शिकायत पुलिस को प्राप्त हो चुकी है और मामले में कार्रवाई जारी है। पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई की घटना से जुड़े मामलों की जांच क्राइम ब्रांच द्वारा की जा रही है।

    पुलिस का कहना है कि इस मामले को लेकर कानूनी और जांच प्रक्रिया पहले से चल रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि साहिल की चोटों और कथित पेलट गन के इस्तेमाल से संबंधित उसकी शिकायत पर अलग से FIR दर्ज की जानी चाहिए।

    कांग्रेस के मुताबिक, साहिल लोचब ने अपने वकीलों के साथ 14 अगस्त को दिल्ली पुलिस से संपर्क किया था और एक लिखित शिकायत भी दी थी। पार्टी का दावा है कि शिकायत के बाद उन्हें न तो जांच अधिकारी का नंबर दिया गया और न ही शिकायत की प्राप्ति का कोई स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध कराया गया। कांग्रेस ने यह भी कहा कि 17 अगस्त को ईमेल और फोन के माध्यम से मामले को दोबारा उठाया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित जवाब या पावती नहीं मिली।

    राहुल गांधी ने पुलिस स्टेशन के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि साहिल अपनी शिकायत दर्ज कराना चाहता है और उसका परिवार न्याय की मांग कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दिल्ली पुलिस FIR दर्ज नहीं करती, तो युवक अपनी शिकायत किसके सामने रखे। राहुल गांधी ने कथित पुलिस कार्रवाई को गंभीर विषय बताते हुए जवाबदेही की मांग की।

    FIR दर्ज होने तक धरना जारी रखने का कांग्रेस का दावा

    कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी का धरना तब तक जारी रहेगा जब तक साहिल लोचब की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इस मांग को लेकर साहिल की आवाज उठा रहे हैं।

    जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस संविधान के तहत शांतिपूर्ण विरोध के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रही है। पार्टी का कहना है कि साहिल किसी राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ नहीं था और वह 20 जुलाई को एक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ था।

    कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि सरकार मुख्य मुद्दे से ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है और प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए बल की जवाबदेही तय नहीं की जा रही है।

    पेलट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद

    20 जुलाई को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर सामने आई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम कुछ लोगों को पेलट से चोटें लगने की बात कही गई। इनमें साहिल लोचब का मामला भी प्रमुखता से सामने आया है।

    दिल्ली पुलिस पहले पेलट गन के इस्तेमाल के आरोपों से इनकार कर चुकी है और इन दावों को गलत तथा भ्रामक बताया था। हालांकि, बाद में सामने आए कुछ दस्तावेजों और रिपोर्टों ने इस मुद्दे को लेकर सवाल खड़े किए।

    रिपोर्टों के अनुसार, संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज एक जनरल डायरी एंट्री में कथित तौर पर उल्लेख किया गया कि रैपिड एक्शन फोर्स यानी RAF के जवानों ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के निर्देश पर एंटी-रायट गन से दो राउंड फायर किए थे। इस जानकारी ने प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल किए गए भीड़ नियंत्रण उपकरणों को लेकर बहस को और तेज कर दिया।

    पेलट गन के इस्तेमाल को लेकर कानूनी और प्रशासनिक सवाल भी उठे हैं। सार्वजनिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस द्वारा बल के इस्तेमाल की सीमा और परिस्थितियों पर लगातार चर्चा होती रही है।

    सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में भी मामला

    20 जुलाई की घटना से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हो रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शीर्ष अदालत ने घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता एक पूर्व न्यायाधीश कर रहे हैं।

    30 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि असाधारण परिस्थितियों में पेलट गन का इस्तेमाल पुलिस की चरणबद्ध प्रतिक्रिया का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, अदालत ने यह विस्तार से स्पष्ट नहीं किया कि किन विशेष परिस्थितियों को पेलट गन के इस्तेमाल के लिए उचित माना जाएगा।

    इस न्यायिक प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के धरने पर सवाल उठाए हैं। BJP नेताओं का कहना है कि जब घटना की जांच पहले से चल रही है और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति पूरे मामले की समीक्षा कर रही है, तब पुलिस स्टेशन में धरना देना राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है।

    BJP ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का धरना राजनीतिक रूप से ध्यान आकर्षित करने का प्रयास है। नड्डा ने कहा कि 20 जुलाई की घटना की जांच के लिए पहले से न्यायिक प्रक्रिया और उच्चस्तरीय समिति मौजूद है।

    BJP सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी राहुल गांधी के धरने को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बिना पूर्व अनुमति के पुलिस स्टेशन में धरने पर बैठे और इसे कानून-व्यवस्था के लिहाज से उचित नहीं बताया।

    BJP नेताओं का कहना है कि पुलिस ने राहुल गांधी को बताया था कि व्यापक घटना से संबंधित मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है और जांच चल रही है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति का भी हवाला दिया और कहा कि मामले में पहले से कानूनी प्रक्रिया जारी है।

    हालांकि कांग्रेस इन दलीलों को स्वीकार नहीं कर रही है। पार्टी का कहना है कि व्यापक घटना की जांच अपनी जगह है, लेकिन साहिल लोचब की व्यक्तिगत शिकायत और उसकी कथित चोटों के संबंध में FIR दर्ज करना अलग विषय है।

    पुलिस स्टेशन के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई

    राहुल गांधी के धरने को देखते हुए पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और RAF जवानों को इलाके में तैनात किया गया।

    पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में ही नई दिल्ली के DCP का कार्यालय भी स्थित है। कांग्रेस नेताओं और समर्थकों की मौजूदगी को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए।

    इस दौरान प्रियंका गांधी भी पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत करती नजर आईं। कांग्रेस नेताओं और पुलिस के बीच बातचीत का केंद्र मुख्य रूप से FIR दर्ज करने की मांग रही।

    आगे भी जारी रह सकता है राजनीतिक विवाद

    राहुल गांधी के धरने ने 20 जुलाई के प्रदर्शन और उस दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर पहले से चल रही राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। कांग्रेस जहां इसे एक घायल युवक के न्याय और कानूनी अधिकार का मामला बता रही है, वहीं BJP इसे राजनीतिक प्रदर्शन और जांच प्रक्रिया पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देख रही है।

    दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि शिकायत प्राप्त हो चुकी है और संबंधित मामलों की जांच चल रही है। ऐसे में आगे की कार्रवाई जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय होने की संभावना है।

    साहिल लोचब की कथित पेलट चोटों, पुलिस कार्रवाई और 20 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़े अन्य मामलों की वास्तविक स्थिति जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही प्रक्रिया और पांच सदस्यीय समिति की जांच भी इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    फिलहाल, राहुल गांधी का पुलिस स्टेशन में धरना दिल्ली में पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों के अधिकार और जवाबदेही को लेकर एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया से मिलने वाले निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

    Click here to Read More
    Previous Article
    US-Iran Conflict Deepens as Washington Tightens Economic Pressure, Oil Markets and Global Shipping Face Fresh Risks
    Next Article
    तमिलनाडु में विधायकों को मुफ्त कार देने पर सियासी घमासान, DMK ने ठुकराया सरकार का प्रस्ताव

    Related देश Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment