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    दिल्ली प्रदर्शन: सीसीटीवी और फेस रिकग्निशन के जरिए प्रदर्शनकारियों की पहचान में जुटी पुलिस, आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की मौजूदगी का दावा

    2 hours ago

    युगचरण न्यूज़ | 28 जुलाई 2026

    नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर हाल ही में हुए सीजेपी (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और फेस रिकग्निशन तकनीक की मदद से प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान कर रही है। पुलिस सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि अब तक हजारों लोगों की पहचान की गई है, जिनमें कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं।

    हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच अभी जारी है।

    सीसीटीवी फुटेज की हो रही जांच

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, 20 और 22 जुलाई को जंतर-मंतर, संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की सैकड़ों घंटों की फुटेज खंगाली जा रही है। जांच एजेंसियां कथित तौर पर उन लोगों की पहचान कर रही हैं, जिन पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा, तोड़फोड़, पुलिसकर्मियों पर हमला और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं।

    बताया जा रहा है कि जांच के दौरान फेस रिकग्निशन सिस्टम का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

    पुलिस का दावा

    सूत्रों के अनुसार, फेस रिकग्निशन तकनीक के माध्यम से अब तक 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका नाम पहले से पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद बताया गया है।

    इन्हीं में से 989 लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, दुष्कर्म, अपहरण, आर्म्स एक्ट तथा पॉक्सो (POCSO) जैसे गंभीर मामलों में केस दर्ज होने का दावा किया गया है।

    पुलिस सूत्रों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार—

    • 101 लोगों पर हत्या के मामले दर्ज बताए गए हैं।
    • 62 लोगों पर हत्या के प्रयास के आरोप हैं।
    • 284 लोगों पर लूट के मामले दर्ज हैं।
    • 61 लोगों पर दुष्कर्म के मामले दर्ज होने का दावा किया गया है।
    • 229 लोगों पर आर्म्स एक्ट के तहत मामले दर्ज बताए गए हैं।
    • 19 लोगों पर अपहरण के मामले हैं।
    • 25 लोगों पर यौन उत्पीड़न तथा 6 लोगों पर पॉक्सो कानून के तहत मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है।

    सूत्रों का यह भी दावा है कि कई लोगों के खिलाफ एक से अधिक आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं।

    किन घटनाओं की जांच हो रही है?

    जांच एजेंसियों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर कई घटनाएं रिकॉर्ड हुई हैं, जिनमें—

    • बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ती भीड़,
    • पुलिस पर पथराव,
    • पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश,
    • सरकारी और निजी संपत्ति में तोड़फोड़,
    • कुछ स्थानों पर आगजनी,
    • पुलिसकर्मियों पर कथित हमला,
    • सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने की घटनाएं शामिल हैं।

    पुलिस का दावा है कि कुछ वीडियो में प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित रूप से पुलिस कर्मियों पर मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाते हुए भी देखा गया है।

    करीब 200 पुलिसकर्मी घायल होने का दावा

    दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान लगभग 200 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। पुलिस का कहना है कि कई वीडियो में घायल पुलिसकर्मियों को घटनास्थल से हटाते हुए देखा गया है।

    हालांकि इन दावों की पुष्टि न्यायिक या स्वतंत्र जांच के माध्यम से अभी नहीं हुई है।

    आपत्तिजनक टिप्पणियों की भी जांच

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कुछ वीडियो में कथित रूप से सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों, संसद तथा पुलिस के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी रिकॉर्ड हुई हैं। जांच एजेंसियां इन वीडियो का विश्लेषण कर रही हैं और आवश्यक कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।

    सीजेपी ने समाप्त किया था आंदोलन

    केंद्र सरकार और सीजेपी के बीच हुई बातचीत के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पश्चात संगठन ने अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी थी।

    इसके बाद देशभर में दर्ज विभिन्न एफआईआर को लेकर भी बहस शुरू हुई। सीजेपी का दावा है कि सरकार ने आंदोलन से जुड़े मामलों में कार्रवाई की समीक्षा करने और कुछ मामलों में एफआईआर वापस लेने का आश्वासन दिया है। हालांकि इस संबंध में संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

    जांच जारी

    फिलहाल दिल्ली पुलिस पूरे मामले की जांच जारी रखे हुए है। सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध सामग्री के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी व्यक्ति की भूमिका और जिम्मेदारी के संबंध में अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।

    उधर, विभिन्न पक्ष इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।

     
     
     
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