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    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस पर ‘पांडुलिपि से प्रकाशन तक’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

    1 hour ago

    जयपुर। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) एवं बुनियादी एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पाँच दिवसीय संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम (FDP) के चतुर्थ दिवस पर शोध-पत्र लेखन एवं प्रकाशन की प्रक्रिया पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को शोध-लेखन, गुणवत्तापूर्ण शोध-पत्र तैयार करने तथा प्रतिष्ठित शोध-पत्रिकाओं में प्रकाशन की प्रक्रिया से अवगत कराना था।

    कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस के मुख्य अतिथि वक्ता पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के उप-पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. नीरज कुमार सिंह रहे। उन्होंने पांडुलिपि से प्रकाशन तक (From Manuscript to Publication) विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया।

    कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. रजनी माथुर, आइक्यूएसी समन्वयक एवं एफ़डीपी संयोजक के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान उच्च शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों के लिए शोध की गुणवत्ता, अकादमिक लेखन तथा शोध-प्रकाशन की प्रक्रियाओं का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है।

    अपने व्याख्यान में डॉ. नीरज कुमार सिंह ने पांडुलिपि तैयार करने से लेकर शोध-पत्र के प्रकाशन तक के विभिन्न चरणों की जानकारी दी। उन्होंने शोध-पत्र की संरचना, उपयुक्त शोध-पत्रिका के चयन, संदर्भों के सही उपयोग, अकादमिक लेखन में मौलिकता, शोध नैतिकता तथा प्रकाशन प्रक्रिया के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्त्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य के लिए व्यवस्थित लेखन, प्रामाणिक संदर्भ सामग्री तथा निर्धारित प्रकाशन मानकों का पालन करने के लिए प्रेरित किया।

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर की प्रेसिडेंट प्रोफ़ेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने अपने संदेश में कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध की गुणवत्ता और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों को शोध एवं प्रकाशन के नवीन आयामों से परिचित कराते हैं तथा विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध संस्कृति के विकास में सहायक सिद्ध होते हैं।

    प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराणा ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षकों का निरंतर व्यावसायिक विकास उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने का महत्त्वपूर्ण माध्यम है।

    डॉ. जितेंद्र कुमार गोयल, एफ़डीपी सह-संयोजक ने कहा कि संकाय विकास कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों की शैक्षणिक, शोध एवं व्यावसायिक दक्षताओं को सुदृढ़ करना है।

    कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रतिभागियों के साथ फीडबैक प्रपत्र पर चर्चा की गई, ताकि कार्यक्रम की उपयोगिता, विषय-वस्तु तथा भविष्य में आयोजित किए जाने वाले शैक्षणिक कार्यक्रमों में सुधार के लिए सुझाव प्राप्त किए जा सकें।

    कार्यक्रम के अंत में डॉ. रोहित सारस्वत, शोध अधिष्ठाता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य वक्ता डॉ. नीरज कुमार सिंह के प्रति शोध-पत्र लेखन एवं प्रकाशन से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी साझा करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी प्रतिभागी शिक्षकों का कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके सहयोग एवं सक्रिय सहभागिता के लिए धन्यवाद किया।

    कार्यक्रम में शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए शोध-लेखन एवं प्रकाशन से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। इस प्रकार एफ़डीपी का चतुर्थ दिवस शोध कौशल के विकास, अकादमिक गुणवत्ता में वृद्धि तथा उच्च शिक्षा में शोध संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में उपयोगी सिद्ध हुआ।

     

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